उस एक दिन लंबे सपने से सच्चाई मेरी रोज़ लड़ती है
कुछ अंदर सिमट कर रह जाए
वो तुम्हारी चुभन का अक्स है
ना रोके मुझे
फिर भी धकेल दे पीछे
ये आँधी
नहीं,
मेरे तुम्हारे साथ के नसीब का फल है
कुछ नया देखने जा रहे हो
तो मुझे भूल कर ही जाना
लौटना मत
मैं अँधेरे में गुम वो
कश्ती हूँ
जिसकी सिसकती हुई लहरों से तुम
अक्सर घबरा जाते हो
वापस मत बताना
कि याद आई थी मेरी
मुझे चुभन के सिवा
और कुछ महसूस नहीं होता
आना मत दोबारा, जल्दी जाओ
क्योंकि मुझे यकीन है, मैं वहीं मिलूँगी
तुम्हारे जो सपने आते हैं,
उन किस्सों से मैंने अपना घर सजाया है
शायद वो घर भी वहीं मिलेगा
क्योंकि उस घर में सपने सच हो जाते हैं
मगर उस घर के लिए दूर तो जाना ही पड़ता है
याद आने पर शायद न मिलूँ
पर ज़रूरत होने पर बिल्कुल मिल जाऊँगी
मैं वो दुआ हूँ
जिसका असर है, पर भीना है
कुछ चीज़ें लिखी होती हैं
मगर कुछ मिटा कर, रगड़ के
वापस खुद से ही लिखनी पड़ती हैं
हमारा किस्सा भी
अब एक अलग उपन्यास का
छोटा अंश बन गया है
तुम चुभन और मैं खरोंच
अब एक नई छवि के साथ
दूसरों के हो जाएंगे
मगर तुम चुभन ही सही
मेरे इस अंत तक हमेशा रहोगे
एक दिन काफी है
एक दिन लंबा सपना
एक सड़क की आवाज़
एक कंपन होती है, घबराहट शरीर जकड़ती है
उस एक दिन लंबे सपने से
सच्चाई मेरी रोज़ लड़ती है
सबसे ज़्यादा ज़लील मुझे मेरी उम्मीदों ने किया है
डराया मुझे सुकून ने
खामोश मुझे इस वक्त ने रखा है
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